What is FCI Full Form? FCI का Full Form क्या होता है? जानें FCI के बारे में जरूरी बातें…

FCI Full Form

दोस्तों क्या आपने कभी FCI शब्द सुना है? या क्या आप जानते हैं की FCI kya hai? FCI की फुल फॉर्म (FCI Full Form) क्या होती है?

नमस्कार दोस्तों the nitin tech.com पर आप सभी का स्वागत है। क्या आप भी इंटरनेट पर FCI के बारे मे (FCI Full Form) ढूंढ रहे है? यदि हाँ तो आज मैं इस आर्टिकल के जरिए आपको FCI kya hota hai? FCI ka Full Form kya hota hai? के बारे में डिटेल में बताने जा रहा हूँ। इस पोस्ट को पढ़कर आप FCI kya hai? (FCI Full Form) के बारे में जान सकेंगे।

FCI kya hai? (FCI Full Form)

तो दोस्तों आपको बता दें कि FCI की Full Form होता है Food Corporation of India ( फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया / भारतीय खाद्य निगम) होता है।

FCI Full Form : Food Corporation of India

FCI Full Form in Hindi : फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (हिंदी में अर्थ: भारतीय खाद्य निगम)

FCI Full Form - Food Corporation of India

Food Corporation of India (FCI) क्या है?

FCI (Food Corporation of India) मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन, भारत सरकार के अधीन एक वैधानिक निकाय है। यह एक सरकारी संस्था है, जो पूरे भारत में अनाज की खरीद, बिक्री और वितरण से संबंधित है। इसे भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा बनाया और चलाया जा रहा है। इस संस्था की स्थापना भारत सरकार ने 1 जनवरी 1965 को Food Corporation Act के तहत किया था। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

यह भारत के नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। Food Corporation of India (FCI) के प्रमुख उत्पाद गेहूं और चावल हैं। FCI को एशिया का सबसे बड़ा सप्लाई चेन मैनेजमेंट माना जाता है।

यह हर साल भारत के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 15-20 प्रतिशत और भारत के कुल चावल उत्पादन का लगभग 12-15 प्रतिशत खरीदता है और खरीद के बाद विभिन्न राज्यों के स्टॉक डिपो में खाद्यान्न की आपूर्ति करता है ताकि राशन कार्ड धारक कम से कम कीमत पर गेहूं और चावल खरीद सकें।

इतना ही नहीं अगर कोई नुकसान होता है तो केंद्र सरकार को नुकसान की भरपाई करनी होती है. FCI की स्थापना के बाद से, “खाद्यान्न की कमी” और “खाद्यान्न की अधिकता” की विभिन्न स्थितियों को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया है। FCI ने भारत को एक खाद्य घाटे वाले देश से एक खाद्य आत्मनिर्भर देश में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लगभग 100 करोड़ की पूंजी से Food Corporation of India (FCI) की शुरुआत हुई थी और आज भी इसका पूरा स्वामित्व भारत सरकार के पास ही है।

Food Corporation of India (FCI) का हेड क्वार्टर न्यू दिल्ली में है और लगभग हर राज्य के राजधानी में इसका रीजनल ऑफिस है, और यहां तक कि बहुत सारे महत्वपूर्ण जिला में भी FCI ने अपना सेंटर खोल रखा है।

आज देश में अधिकतर अनाजों का दाम सालों भर लगभग एक समान बना रहता है उसके पीछे एफसीआई के द्वारा उठाए जा रहे हैं कई महत्वपूर्ण कदमों का योगदान है।

FCI का मुख्य काम उचित समय पर फसलों को खरीद कर उनको स्टोर करना, विक्रय और स्मूथ डिस्ट्रीब्यूशन को सुनिश्चित करना है।

जैसे जब गेहूं की फसल तैयार होती है तो भारतीय खाद्य निगम (FCI) यह कैलकुलेट करता है कि साल भर में पूरे देश के लिए कितने गेहूं की जरूरत है, उसके अनुसार यह अपना स्टॉक तैयार करता है, और आयात या निर्यात का सुझाव सरकार को देता है।

खाद्य पदार्थों को बफर स्टॉक तैयार करना, मूल्य स्थिरता के लिए बाजार में हस्तक्षेप करना भी FCI का प्रमुख काम है।

FCI के द्वारा बहुत बड़ी मात्रा में अनाज खरीद किए जाने के कारण किसानों को उनके फसल की Minimum Support Price यानी MSP मिलने में मदद मिलती है।

FCI का इतिहास

भारतीय खाद्य निगम की स्थापना वर्ष 1965 में भारत सरकार के उपभोक्ता मंत्रालय के अधीन एक उपक्रम के रूप में की गयी । इसका मुख्य कार्य भारत मे मुख्य खाद्य वस्तुओं के भंडारण के लिए स्थापित की गई थी ताकि युद्ध, अकाल एवं किसी अन्य राष्ट्र व्यापी संकट के समय देश में अन्न की समस्या न हो ।

अपनी स्थापना के समय भारत गंभीर खाद्य संकट से जूझ रहा था और इसका मुख्य कार्य खाद्य सुरक्षा प्रदान करना था । बाद में जब देश की खाद्य समस्या सुलझ गयी तो फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) का कार्य किसानों को उसकी उपज जी सही कीमत दिलाने और गरीबो को खाद्यान्न सुरक्षा देने में हो गयी। हालांकि अभी भी FCI ही देश में खाद्य सुरक्षा प्रदान करने वाली संस्था के रूप में ही कार्य कर रहा है।

Food Corporation of India (FCI) के कार्य

FCI भारत सरकार के द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से धान, चावल, गेहू और कुछ सीमित जगहों पर दलहन की भी खरीदारी करता है। देश के लगभग प्रत्येक जिले में FCI का एक गोदाम अथवा उसके द्वारा अधिकृत गोदाम अवश्य होते है।

इस प्रकार में खरीदारी के तीन मुख्य उदेश्य/ कार्य होते है :

  1. किसानों को उनके फसलों की उचित मूल्य दिलाना ताकि वो अपने पैदावार को लेकर निश्चिंत रहे और अधिक से अधिक अन्न उपजाए। इससे किसानों का मनोबल भी ऊंचा रहता है और देश मे अनाज की कमी नही रहती ।
  2. किसानों से खरीदे गए अनाजो के प्रयोग सरकार अनेक कल्याणकारी योजनाओं में करती है जैसे काम के बदले अनाज, मध्यान भोजन, जन वितरण प्रणाली (PDS), अंत्योदय योजना इत्यादि। सरकार इस अनाज का प्रयोग बेहद गरीब लोगों को भुखमरी से बचाने में भी प्रयोग करती है ।
  3. खाद्य सुरक्षा किसी भी देश को अंतराष्ट्रीय भयादोहन ( ब्लैकमेल) से बचाती है। भारत 1965/66 तक इससे पीड़ित था, जब न चाहते हुए भी उसे अमेरिका की मनमानी बात को मानना पड़ता था जबकि अब ऐसा नही है। साथ ही में अकाल, बाढ़ और युद्ध के समय मे बेतहाशा मंहगाई से भी रक्षा करती है (वेनेजुएला और ज़िम्बाबवे का उदाहरण हैं)। इसी तरह देश में मुद्रास्फीति को नियंत्रण करने में भी इसका योगदान होता है।
इन्हें भी देखें :-  What is BUMS Full Form? BUMS का Full Form क्या होता है? जानें BUMS के बारे में जरूरी बातें…

पर यह बात याद रखनी चाहिए कि Food Corporation of India (FCI) कोई स्वायत्त संस्था नही है। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने, अनाजो के परिवहन, स्थांतरण एवं किसानों को सब्सिडी या फिर PDS योजनाओ को लेकर कोई नीति नही बनाता। यह तो बस केंद्र सरकार के अधीन काम करता है। किसानों से खरीदारी और योजनाओं पर खर्च का पूरा भार केंद्र सरकार वहन करती है।

Food Corporation of India (FCI) के उद्देश्य

पूरे भारत में अनाज की उपलब्धता बराबर बनी रहे यह FCI के द्वारा उठाए जाने वाले कई महत्वपूर्ण कदमों पर डिपेंड करता है, FCI के मुख्य उद्देश्य निम्न है :-

  • Food Corporation of India (FCI) उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए खाद्यान्न के बाजार मूल्य को विनियमित करने के लिए प्रयासरत रहता है।
  • किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले इसके लिए प्रभावी मूल्य समर्थन अभियान चलाया जाता है।
  • यह पूरे भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्यान्न के स्तर और स्टॉक के स्तर को बनाए रखने का काम करते है।
  • सार्वजनिक वितरण दुकान (PDS) के माध्यम से विशेष रूप से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए उचित मूल्य पर खाद्यान्न सुलभ कराना।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशनिंग) के लिए देश भर में खाद्यान्न की सुचारू रूप से आवाजाही सुनिश्चित करता है।

FCI से संबंधित कुछ जरूरी बातें

  • भारत सरकार द्वारा संचालित Food Corporation of India (FCI) की स्थापना 1 जनवरी 1965 को Food Corporation Act के तहत की गई थी।
  • FCI को लगभग 100 करोड़ की पूंजी से शुरू किया गया था और यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में है।
  • FCI हर साल गेहूं और धान की खरीद करता है।
  • इनका मुख्य कार्य फसलों को खरीद कर समय पर भण्डारण, विक्रय एवं सुचारू वितरण सुनिश्चित करना है।
  • FCI द्वारा भारी मात्रा में खरीदे गए अनाज के कारण, यह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि MSP प्राप्त करने में मदद करता है।
  • इस समय FCI के पास सभी अनाजों को मिलाकर 800000 मीट्रिक टन से ज्यादा स्टोरेज की कैपेसिटी है।
  • भारत सरकार की गरीब लोगों के लिए चलाई जाने वाली एक बहुत ही बड़ी महत्त्वाकांक्षी योजना, Food Security को सफल बनाने में FCI का बहुत बड़ा योगदान है
  • Food Corporation of India (FCI) का मुख्यालय नई दिल्ली में है और लगभग सभी राज्यों की राजधानियों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

Food Corporation of India (FCI) में जॉब

Food Corporation of India (FCI) में काम करने वाले कुल कर्मचारियों की संख्या 21000 से ज्यादा है, और हर साल FCI के कई महत्वपूर्ण पोस्ट के लिए वैकेंसी आती है, जिसके लिए युवा अप्लाई कर नौकरी प्राप्त कर सकते हैं

कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट जिसके लिए FCI में हाल में ही जॉब के लिए आवेदन मांगे थे

  • Junior Engineer
  • Engineer
  • Assistant Grade 2
  • Computer Operator

Food Corporation of India (FCI) में जॉब पाने के लिए क्या करे?

Food Corporation of India (FCI) में हजारों कर्मचारी काम करते हैं। यह हर साल बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर भर्तियां निकालता है।

अगर आप FCI यानी भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India) में जॉब पाने के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो आपके पास 12वीं के बाद स्नातक या डिग्री होनी चाहिए।

इसके अलावा आपके पास कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान होने के साथ-साथ अच्छी टाइपिंग स्पीड भी होनी चाहिए। आपकी उम्र 18 साल से 25 साल के बीच होनी चाहिए।

यदि आप अपने ऊपर दिए गए सभी विवरणों को पूरा करते हैं तो आप Food Corporation of India (FCI) में नौकरी के लिए एप्लाई कर सकते हैं। क्योंकि इसमें सरकार समय-समय पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी करती रहती है।

जिसमें आप Food Corporation of India (FCI) में इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर, टाइपिस्ट, चौकीदार, एसिसेंट ग्रेड 3 और अन्य पदों के लिए एप्लाई कर सकते हैं।

Food Corporation of India (FCI) में जॉब पाने के लिए आवश्यक योग्यता क्या चाहिए?

  • FCI में जूनियर इंजीनियर की पोस्ट के लिए इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिप्लोमा या डिग्री होनी चहिए। अगर डिप्लोमा है तो एक साल का वर्क एक्सपीरियंस भी जरूरी है। साथ ही उम्मीदवार की आयु 18 से 28 वर्ष के बीच में होनी चाहिए।
  • इसी तरह FCI में स्टेनोग्राफर की पोस्ट के लिए किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री अनिवार्य है। एवं DOEACC में O लेवल की क्वालिफिकेशन हो। अगर ये नहीं है तो कंप्यूटर साइंस या कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिग्री होना जरूरी है। साथ में शॉर्टहैंड में 40 से 80 वर्ड पर मिनट की स्पीड होना चाहिए। उम्मीदवार की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • इसी तरह FCI में टाइपिस्ट की पोस्ट के लिए किसी भी क्षेत्र से ग्रेजुएशन कंप्लीट होना जरूरी है। इसके अलावा टाइपिंग स्पीड कम से कम 30 वर्ड पर मिनट होना जरूरी है। कंप्यूटर का ज्ञान एवं हिंदी व इंग्लिश टाइपिंग आता हो तो बेहतर है। उम्मीदवार की आयु 18 से 25 वर्ष के बीच में होनी चाहिए।
  • इसी तरह FCI में वॉचमैन की पोस्ट के लिए उम्मीदवार का कक्षा 8वीं का पास होना अनिवार्य है। साथ में उम्र 18 से 28 के बीच होनी चाहिए।
  • इसी तरह FCI में मैनेजर जनरल की पोस्ट के लिए किसी सरकारी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से न्यूनतम 60 फीसदी नंबर के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री का होना आवश्यक है।

Food Corporation of India (FCI) किसानों के अनाज कैसे खरीदती है?

Food Corporation of India (FCI) किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की ख़रीद दो तरीक़ों से करता है। यह राज्य सरकारों की व्यवस्था पर निर्भर करता है कि किस तरह से उनके राज्य में ख़रीद हो।

कुछ राज्य जैसे उत्तर प्रदेश में किसानों से सीधे फसल की ख़रीद की जाती है। इसमें सभी ख़रीद एजेंसियाँ अलग-अलग क्षेत्र में अपने ख़रीद केन्द्र संचालित करती हैं। वहॉं पर आस पास के किसान अपनी उपज लेकर आते हैं। किसान की फसल नम्बर वार ख़रीदी जाती है।

इन्हें भी देखें :-  DPR Full Form in Hindi | DPR का मतलब क्या होता है? जानें DPR के बारे में जरुरी बातें

ख़रीद से पहले ख़रीद अधिकारी उस फसल का निरीक्षण कर तय करता है कि फसल की क्वालिटी आवश्यकता के अनुरूप है या नहीं। यदि फसल की क्वालिटी आवश्यकता के अनुरूप नहीं है तब किसान को यह सलाह दी जाती है कि फसल को साफ़ करके या अन्य विधि से उच्चीकरण से फसल की क्वालिटी को अनुरूप बनाए।

इसके लिए वह स्वयं यह कार्य कर सकता है या केन्द्र पर उपस्थित मज़दूरों से करवा सकता है, जिसका लेबर खर्च मनमाने तरीक़े से किसान से वसूला नहीं जा सकता, केवल मंडी समिति की निर्धारित दर ही किसान को देय होती है। ख़रीद में फसल की सफ़ाई के बाद मुख्य अवयव नमी होता है, जो प्रत्येक फसल में अलग-अलग होता है (जैसे गेहूँ में नमी 12%) इससे अधिक नहीं होनी चाहिए, जिसको नमी मापक यंत्र (Moisture Meter) से ज्ञात किया जाता है।

यदि नमी स्वीकृत प्रतिशत के अंदर है तब उसकी फसल एजेंसी के स्वीकृत ठेकेदार की लेबर द्वारा कट्टों में भर कर निश्चित तौल में ( जैसे गेहूँ 50 किलो) तौल लिया जाता है। यदि नमी स्वीकृत मान से ज़्यादा हो, परन्तु अस्वीकार्य लिमिट के भीतर हो तब या तो फसल को खोल कर सुखाया जाता है, जब तक नमी स्वीकृत लिमिट में न आ जाए, इसको किसान स्वयं कर सकता है या मंडी रेट पर मज़दूरों से करवा सकता है, अथवा फसल को न सुखा कर मूल्यानुसार नमी कटौती करवा कर बेच सकता है। साधारणत: फसल को सुखा लिया जाता है।

तौल होने पर कुल भार का न्यूनतम दर से कुल कीमत का बिल बनाकर किसान को दे दिया जाता है। उस बिल के आधार पर भुगतान अधिकारी उस कीमत का संयुक्त हस्ताक्षर युक्त चैक तभी व उसी स्थान पर किसान को दे दिया जाता है। अपडेट : 2020 के बाद से चैक से भुगतान न कर सीधे किसान के खाते में भुगतान कर दिया जाता है।

किसान से केन्द्र पर किसी भी कार्य के लिए जैसे वाहन से फसल उतारना, झरने से छानना के लिए केवल मंडी रेट से भुगतान लिया जा सकता है, अन्य किसी ऊँची दर से नहीं। यदि किसान यह कार्य स्वयं करता है इसका भुगतान उससे नहीं लिया जा सकता । इसके अलावा, अन्य किसी भी कार्य का भुगतान किसान को नहीं करना पड़ता जैसे कट्टे का मूल्य, कट्टे में फसल भरना, तौलना, कट्टों की सिलाई आदि, इसका भुगतान ख़रीद एजेंसी (Food Corporation of India / FCI) करती है।

इसके अलावा केन्द्र पर किसानों को बैठने, पानी पीने इत्यादि की व्यवस्था भी मंडी समिति के माध्यम से FCI निगम ही करता है। यदि बिना बिकी फसल शेष रह जाती है तब फसल की सुरक्षा, वर्षा से बचाव के लिए तिरपाल आदि की व्यवस्था निगम मुफ़्त कराता है।

जिन राज्यों में अनाज की ख़रीद मंडी समिति के परिसर में आढ़ती (कमीशन एजेंट) के माध्यम से होती है वहाँ ख़रीद एजेंसियों को मंडी के आकार के अनुसार ख़रीद के दिन निश्चित कर दिये जाते हैं। प्रत्येक एजेंसी के ख़रीद अधिकारी, अन्य अधिकारियों (एक मंडी समिति का अधिकारी व एक राज्य खाद्य विभाग का अधिकारी) के साथ ख़रीद कर बोली रजिस्टर में ख़रीद का ब्यौरा दर्ज करता है, यह ब्यौरा अन्य दोनों अधिकारी भी दर्ज करते हैं।

इस सिस्टम में किसान आढ़ती की दुकान पर अपनी फसल ले कर आता है, फिर आढ़ती की लेबर उसको उतार कर साफ़ कर एक गोल ढेरी लगा देते हैं। आढ़ती अपने अनुभव से देखता है कि फसल स्वीकृत नमी से ऊपर तो नहीं, यदि ऊपर होती है तब उसे खोल कर सुखवाता है, फिर ढेरी बनवाता है।

इसके बाद जब सभी आढ़तियों का ढेरी बनाने का काम पूरा हो जाता है तब एजेंसी का ख़रीद अधिकारी, अन्य दो अधिकारियों के साथ क्रम से आढ़ती वार ढेरियो का निरीक्षण कर स्वीकृत ढेरियों को बोली रजिस्टर में दर्ज करते हैं। जिन ढेरियों की बोली लग जाती है, उनको आढ़ती की लेबर कट्टों में भरने, तौलने, सिलने का कार्य करती है।

यहाँ भी नमी पहले की तरह नापी जाती है, स्वीकृत लिमिट से ज़्यादा होने पर वह रजिस्टर में दर्ज नहीं की जाती, उसको आढ़ती फिर से सुखाने का काम करवाता है व अगली बोली में चैक करवा कर रजिस्टर में लिखवाता है।

अगले दिन आढ़ती अपनी बेच का किसान वार बिल ख़रीद अधिकारी को सौंपता है, जिसे वह अपने रजिस्टर से मिलान कर, अन्य कार्यवाही कर बिल भुगतान कार्यालय भेजता है, जहां से भुगतान अधिकारी, आढतीवार चैक काट कर ख़रीद अधिकारी को तुरंत भेज देते हैं।

आढ़ती चैक प्राप्त होने पर उन किसानों को भुगतान कर देते हैं जिनके नाम का बिल दिया गया था व जिनका भुगतान चैक से आया है । अपडेट : 2020 से यहाँ भी भुगतान किसान को सीधे उसके खाते में डाल दिया जाता है । इस सब कार्य के लिये आढ़ती को 2.5% मूल्य का कमीशन का भुगतान निगम अलग से करता है, जिसकी कोई कटौती किसान से नहीं की जाती।

अन्य एजेंसियों व निगम की कार्य शैली में यह अंतर होता है कि निगम के अधिकारी प्रशिक्षित होते हैं, उन्हें अनुभव अधिक होता है, जिससे किसी प्रकार के विवाद नहीं होते। दूसरे निगम का सर्वोच्च अधिकार होता है, अन्य एजेंसी भी निगम के निर्देशों पर ही कार्य करती हैं, निगम एक लीडर की तरह कार्य कर अन्यों को नेतृत्व प्रदान करता है। निगम की भुगतान व्यवस्था सुदृढ़ रहती है जिससे किसानों को या आढ़तियों को भुगतान में एक दिन की भी देरी नहीं होती। इसी कारण से किसान व आढ़ती निगम को बेचने में प्राथमिकता देते हैं। किसान का शोषण नहीं होता न ही भुगतान में परेशानी होती है।

तो दोस्तो ऊपर आर्टिकल में हमने आपको FCI के फुल फार्म (FCI Full Form) : Food Corporation of India (भारतीय खाद्य निगम) के बारे में जानकारी दी है। दोस्तों यहां आपको बता दे की इस FCI वर्ड के इसके अलावा भी कुछ अन्य फुल फार्म होते हैं जिसके बारे में जानकारी यहां नीचे दी हुई है।

Some Other FCI Full Form

FCI Full Form in Banking : Finance, Competitiveness & Innovation Global Practice (FCI)

TermFull Form
FCIFood Craft Institute
FCIFunctional Configuration Identification
FCIFederal Correctional Institution Foreign Counterintelligenc
FCIFunctional Capacity Index
FCIFlight Control Integration
FCIFreshman Computer Initiative
FCIFieldcrest Cannon International
FCIFast Causal Inference
FCIFactory Connections International
FCIFall Creek Intermediate
FCIFacility Condition Index
FCIFailed Customer Interaction
FCIFriendly Center, Inc.
FCIFortin Construction, Inc.
FCIFeed Certification Institute
FCIFramatome Connectors International
FCIFederation Cynologique Internationale
इन्हें भी देखें :-  What is MNC Full Form? MNC का Full Form क्या होता है? जानें MNC के बारे में जरूरी बातें…

FAQ About FCI Full Form

 

Q. FCI का मतलब क्या होता है? / What is FCI Full Form

Ans : FCI की Full Form होता है Food Corporation of India ( फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया / भारतीय खाद्य निगम) होता है।
FCI Full Form : Food Corporation of India
FCI Full Form in Hindi : फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (हिंदी में अर्थ: भारतीय खाद्य निगम)
FCI (Food Corporation of India) मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन, (Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Distribution) भारत सरकार के अधीन एक वैधानिक निकाय है। यह एक सरकारी संस्था है, जो पूरे भारत में अनाज की खरीद, बिक्री और वितरण से संबंधित है। इसे भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा बनाया और चलाया जा रहा है। इस संस्था की स्थापना भारत सरकार ने 1 जनवरी 1965 को Food Corporation Act के तहत किया था।
लगभग 100 करोड़ की पूंजी से Food Corporation of India (FCI) की शुरुआत हुई थी और आज भी इसका पूरा स्वामित्व भारत सरकार के पास ही है।
Food Corporation of India (FCI) का हेड क्वार्टर न्यू दिल्ली में है और लगभग हर राज्य के राजधानी में इसका रीजनल ऑफिस है, और यहां तक कि बहुत सारे महत्वपूर्ण जिला में भी FCI ने अपना सेंटर खोल रखा है।

Q. FCI का क्या काम है? What is the work of FCI?

Ans: यह एक सरकारी संस्था है, जो पूरे भारत में अनाज की खरीद, बिक्री और वितरण से संबंधित है।
यह भारत के नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करता है। Food Corporation of India (FCI) के प्रमुख उत्पाद गेहूं और चावल हैं। FCI को एशिया का सबसे बड़ा सप्लाई चेन मैनेजमेंट माना जाता है।
यह हर साल भारत के कुल गेहूं उत्पादन का लगभग 15-20 प्रतिशत और भारत के कुल चावल उत्पादन का लगभग 12-15 प्रतिशत खरीदता है और खरीद के बाद विभिन्न राज्यों के स्टॉक डिपो में खाद्यान्न की आपूर्ति करता है ताकि राशन कार्ड धारक कम से कम कीमत पर गेहूं और चावल खरीद सकें।
इतना ही नहीं अगर कोई नुकसान होता है तो केंद्र सरकार को नुकसान की भरपाई करनी होती है. FCI की स्थापना के बाद से, “खाद्यान्न की कमी” और “खाद्यान्न की अधिकता” की विभिन्न स्थितियों को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया है। FCI ने भारत को एक खाद्य घाटे वाले देश से एक खाद्य आत्मनिर्भर देश में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज देश में अधिकतर अनाजों का दाम सालों भर लगभग एक समान बना रहता है उसके पीछे एफसीआई के द्वारा उठाए जा रहे हैं कई महत्वपूर्ण कदमों का योगदान है।
FCI का मुख्य काम उचित समय पर फसलों को खरीद कर उनको स्टोर करना, विक्रय और स्मूथ डिस्ट्रीब्यूशन को सुनिश्चित करना है।
जैसे जब गेहूं की फसल तैयार होती है तो भारतीय खाद्य निगम (FCI) यह कैलकुलेट करता है कि साल भर में पूरे देश के लिए कितने गेहूं की जरूरत है, उसके अनुसार यह अपना स्टॉक तैयार करता है, और आयात या निर्यात का सुझाव सरकार को देता है।
खाद्य पदार्थों को बफर स्टॉक तैयार करना, मूल्य स्थिरता के लिए बाजार में हस्तक्षेप करना भी FCI का प्रमुख काम है।
FCI के द्वारा बहुत बड़ी मात्रा में अनाज खरीद किए जाने के कारण किसानों को उनके फसल की Minimum Support Price यानी MSP मिलने में मदद मिलती है।

Q. क्या FCI में मिलने वाली जॉब सेंट्रल गवर्मेंट जॉब होती है? Is FCI central govt job?

Ans : हालांकि, FCI केंद्र सरकार का उपक्रम है और केंद्र सरकार के दायरे में आता है। लेकिन, एक FCI कर्मचारी को केंद्र सरकार के केंद्रीय नागरिक कर्मचारी के रूप में नहीं माना जाता है।

Q. FCI एग्जाम के लिए पात्रता मानदंड क्या है? Who is eligible for FCI exam?

Ans : Food Corporation of India (FCI) में हजारों कर्मचारी काम करते हैं। यह हर साल बड़ी संख्या में रिक्त पदों पर भर्तियां निकालता है।
अगर आप FCI यानी भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India) में जॉब पाने के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो आपके पास 12वीं के बाद स्नातक या डिग्री होनी चाहिए।
इसके अलावा आपके पास कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान होने के साथ-साथ अच्छी टाइपिंग स्पीड भी होनी चाहिए। आपकी उम्र 18 साल से 25 साल के बीच होनी चाहिए।
यदि आप अपने ऊपर दिए गए सभी craiteria को पूरा करते हैं तो आप Food Corporation of India (FCI) में नौकरी के लिए एप्लाई कर सकते हैं।

 मिस्टर नितिन कुमार the nitin tech.com के Founder और Author है। इन्हें हमेशा से टेक्नोलॉजी से सम्बंधित जानकारी लेना और उसे लोगो के साथ शेयर करना पसंद है। अगर आपको इनके द्वारा शेयर की गई जानकारी अच्छी लगती है तो आप इन्हे Social Media पर फॉलो कर सकते है। Thank You!

इसे शेयर करें

Leave a Comment